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Firse Jine Do Kavita Hindi Alok
फिरसे जीने दो – कविता (firse jine do Hindi poem)
1st May 2019

फिरसे जीने दो – कविता (firse jine do Hindi poem)

प्रतीक्षा की बहुत अब तक, और स्वप्न देखे ना जाने कितने! प्रेम की ये प्रतिध्वनि, तुम्हारी मुखाकृति का वो प्रतिविम्ब आज भी ह्रदय में मेरे सुसज्जित हैं, यथावत। किन्तु अब, जब पुनः सामने लाया तुम्हें मेरे प्रारब्ध, तब, और विलम्ब…

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Sunday Shayaris By Alok Mishra - Episode Two
Sunday Shayaris – episode 2
28th April 2019

Sunday Shayaris – episode 2

खुद को भिगोयें भी कितना अल्फ़ाज़ों की बरसात में? पुरे बादलों के समंदर में बस तुम्हारी ही तो खुशबु है! *****************************************   तुम्हें और याद करूँ तो शायद मेरी जान चली जाये, पर भुलाके तुम्हें एक पल जी भी तो…

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Sunday Shayaris By Alok Mishra - Episode One
Sunday Shayaris – Episode one
20th April 2019

Sunday Shayaris – Episode one

थोड़ी तुम हो, थोड़ा मैं हूँ और थोड़ी ज़िन्दगी है। आह! कौन जान सका है इसे? अधूरा मैं हूँ, अधूरी तुम हो और अधूरी ज़िन्दगी है! ******************** शायद उस रूह के रहनुमाओं को इस आत्मा से गुरेज़ था, वर्ना कहाँ…

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