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कविता तुम हो – Hindi Poem

  कवि हूँ या नहीं मैं दुनिया बाद में निर्णय कर ले पर मेरी कविताओं की तो आत्मा तुम हो शब्द मेरे भले ही उभरते कागजों पे हों एक-एक शब्द की वासना तुम हो तुम हो तो मैं हूँ और है मेरी कविता इस प्रेम के सूरदास की उपासना तुम हो!   by Alok Mishra  dedicated to M

By | June 23rd, 2018|Love|2 Comments

देखा तुम्हें मैंने, फिरसे… Hindi Poem

देखा तुम्हें मैंने, फिरसे... फिरसे देखा तुम्हें आज मैंने जब आके तुम सुबह-सुबह मेरे पास बैठी और भींगे बालों से टपकती वो दो-चार बूंदें छू गयी फिरसे शरीर के अंदर छुपी मेरी आत्मा को।  .. देखा मैंने फिर आँखों में तुम्हारी और कोशिश की फिरसे लगातार असफलताओं के सिलसिले को तोड़ देने की - गहराईयों में तुम्हारे चक्षुओं की फिरसे डूब गया मैं पर जान न सका सीमाओं को; क्या [...]

By | April 23rd, 2018|Love|0 Comments

कभी तो मिलो – हिंदी कविता | Kabhi to Milo – Hindi Poem

  किसी चौराहे पे किसी दोराहे पे किसी मोड़ पे कभी तो दिखो जीवन के किसी छोड़ पे और सुकून मिले मेरी तरसती आँखों को और तृष्णा मिटे इस बेरुखे मन की जो कोसता रहता है मेरे सूनेपन को, अक्सर मेरी तन्हाइयों में खोजता रहता है तुम्हारी परछाइयों को ....... ज़िद है तुम्हें पा लेने की तुम्हारे वजूद को मेरे अस्तित्व में डूबा लेने की और मिल जाने को तुमसे [...]

By | April 7th, 2018|Love|0 Comments

मैं और तुम – the valentine poem

काश वो वक्त ठहर जाता और मैं समेट लेता सारी खुशियाँ जो लायी थी मेरे चेहरे पे तुम्हारे चेहरे की एक झलक ने! दिन गुजरे और महीने और फिर साल साल दर साल बस निकलते गये मानो जैसे सबने ठान ली हो नदियों के जैसे बह जाने को ... समय की लहरों ने कभी दूर तो कभी पास किया मुझे और तुम्हें एक दूसरे के। अलग तो कभी हम हो [...]

By | February 14th, 2018|Love|0 Comments

I don’t remember her eyes – a poem

I don't remember her eyes. I don't remember those dark, big and beautiful eyes. I don't remember at all how they pushed me to a state of surmise - I really don't remember! Believe me; I don't.   for M A Poem A Day...

By | February 10th, 2018|Love|0 Comments