Love

एक बरस निकल गया – Hindi poem on love’s journey

  कुछ तो था कहीं न कहीं अधूरा मुझमें, और शायद तुम में भी। वर्षों की तन्हाई, एक लम्बी जुदाई, अलग-अलग राहों पे अपने-अपने सफर, अनजान, खोये अपने जीवन में हम-तुम कुछ तो हुआ तुम्हें और फिर मुझे भी की रुकी तुम फिर से उसी मोड़ पे और पुकारा मुझे फिर से गहराई थी, एक ठहराव सा तुम्हारी आवाज में, मानो वर्षों की कहानियाँ कह दी हो तुमने एक लम्हें [...]

By | October 31st, 2018|Love|1 Comment

प्रेम बस पाना ही तो नहीं! कविता

  अब कौन कहाँ है? किसे देखूं? प्रश्न किससे करूँ? जख्म हरा है भर जाये शायद, आज कल, महीनों या वर्षों में। पर कौन होगा अब सम्हालने मेरी बिखरती उम्मीदों को? कौन समझेगा मेरे सपनों को? याद है मुझे (तुम्हें भी तो याद होगा ही) कैसे अश्रुधार में, डबडबाती आँखों से देखा था हमने एक-दूसरे को जब हाथ छुड़ाए हमने परिस्थितियों से हारके। सहज सरल सरस बस समझ गए हम [...]

By | September 16th, 2018|Love|3 Comments

when we lost – a poem

That helpless memory of helpless me and you too, helpless and just nothing could we do about it when we had to exit our dreamy world and embrace the rotten garden; yes, once again!   for us both, forever

By | September 14th, 2018|Love|0 Comments

Familiar Stranger – Love & Mystery – Poem

Why should I stop this ever-unsung tune of warmth of this strange coldness that brings our love closer when I hold you just beneath my breath and your lips give salvation to mine and properly, carefully enshrine the bodies which pleasantly cage our happy souls and after all this, I think never to pull the curtain because we need to be free and to be free we need this mystery [...]

By | August 2nd, 2018|Love|0 Comments

कविता तुम हो – Hindi Poem

  कवि हूँ या नहीं मैं दुनिया बाद में निर्णय कर ले पर मेरी कविताओं की तो आत्मा तुम हो शब्द मेरे भले ही उभरते कागजों पे हों एक-एक शब्द की वासना तुम हो तुम हो तो मैं हूँ और है मेरी कविता इस प्रेम के सूरदास की उपासना तुम हो!   by Alok Mishra  dedicated to M

By | June 23rd, 2018|Love|3 Comments

देखा तुम्हें मैंने, फिरसे… Hindi Poem

देखा तुम्हें मैंने, फिरसे... फिरसे देखा तुम्हें आज मैंने जब आके तुम सुबह-सुबह मेरे पास बैठी और भींगे बालों से टपकती वो दो-चार बूंदें छू गयी फिरसे शरीर के अंदर छुपी मेरी आत्मा को।  .. देखा मैंने फिर आँखों में तुम्हारी और कोशिश की फिरसे लगातार असफलताओं के सिलसिले को तोड़ देने की - गहराईयों में तुम्हारे चक्षुओं की फिरसे डूब गया मैं पर जान न सका सीमाओं को; क्या [...]

By | April 23rd, 2018|Love|0 Comments

कभी तो मिलो – हिंदी कविता | Kabhi to Milo – Hindi Poem

  किसी चौराहे पे किसी दोराहे पे किसी मोड़ पे कभी तो दिखो जीवन के किसी छोड़ पे और सुकून मिले मेरी तरसती आँखों को और तृष्णा मिटे इस बेरुखे मन की जो कोसता रहता है मेरे सूनेपन को, अक्सर मेरी तन्हाइयों में खोजता रहता है तुम्हारी परछाइयों को ....... ज़िद है तुम्हें पा लेने की तुम्हारे वजूद को मेरे अस्तित्व में डूबा लेने की और मिल जाने को तुमसे [...]

By | April 7th, 2018|Love|0 Comments

मैं और तुम – the valentine poem

काश वो वक्त ठहर जाता और मैं समेट लेता सारी खुशियाँ जो लायी थी मेरे चेहरे पे तुम्हारे चेहरे की एक झलक ने! दिन गुजरे और महीने और फिर साल साल दर साल बस निकलते गये मानो जैसे सबने ठान ली हो नदियों के जैसे बह जाने को ... समय की लहरों ने कभी दूर तो कभी पास किया मुझे और तुम्हें एक दूसरे के। अलग तो कभी हम हो [...]

By | February 14th, 2018|Love|0 Comments

I don’t remember her eyes – a poem

I don't remember her eyes. I don't remember those dark, big and beautiful eyes. I don't remember at all how they pushed me to a state of surmise - I really don't remember! Believe me; I don't.   for M A Poem A Day...

By | February 10th, 2018|Love|0 Comments