Love

I am Love & She is Loved – a long poem

  Long ago, the story began with a pretty maiden and a faithful, lunatic man. Entirely unknown to each other, they knew the wishes of fate neither. The moon was there to soothe and the Sun was meant to shine - every morning and die in the evening every day. If love strikes when we desire the least to decay, believe me all, it is meant to go all the [...]

By | April 22nd, 2019|Love|0 Comments

बंदिशों को टूट जाने दो… love poem in Hindi

  पंख तो दे दिये अरमानों को तुमने अब बंदिशों को भी टूट जाने दो अनंत तक देख लेने दो तुम्हें समीप से अब दायरों को पीछे छूट जाने दो प्रेम में कोई बंधन तो नहीं होता? बताओ अगर मुहब्बत में फासले होते हों तो। शब्द तो हार गए कबके इसे परिभाषित करने के प्रयत्न में अगर कोई अल्फ़ाज़-बयां चाहत का हो तो बता दो। जताओ न चाहतें अब दूर [...]

By | March 22nd, 2019|Love|0 Comments

Love is too bright to be dark… a poem by Alok Mishra

A heart too big? A mind too narrow? A life seemingly unending? A world too daunting to live? Where is the truth I was looking for? Does love end? Does love fail? Seldom often rarely never always Yes, a hiatus a look away a pause in the incessant stroll and it will roll once again towards the destination, a destination that's destiny too, perpetually there, always true. Only lovers know. [...]

By | March 8th, 2019|Love|1 Comment

निर्वाण – Hindi Poem

जैसे निर्वाण मिला हो मेरी मोक्ष की महत्वाकांक्षा को बस एक बार जो छू लेते हैं लब तेरे मेरे प्रफुल्लित अधरों को जो बस अंकुरित से हुए हैं प्रेम की बारिश में! मेरी इच्छाओं की धुंध पे पड़ती हैं जब धुप तुम्हारी मुहब्बत की सिहर उठता है मेरा मन, एक आवेश में और छूट जाता है तन पीछे, कोसों दूर कहीं प्रकाश, तेज, नूर… कहीं ये मिलन तो नहीं व्याकुल [...]

By | January 17th, 2019|Love|0 Comments

एक बरस निकल गया – Hindi poem on love’s journey

  कुछ तो था कहीं न कहीं अधूरा मुझमें, और शायद तुम में भी। वर्षों की तन्हाई, एक लम्बी जुदाई, अलग-अलग राहों पे अपने-अपने सफर, अनजान, खोये अपने जीवन में हम-तुम कुछ तो हुआ तुम्हें और फिर मुझे भी की रुकी तुम फिर से उसी मोड़ पे और पुकारा मुझे फिर से गहराई थी, एक ठहराव सा तुम्हारी आवाज में, मानो वर्षों की कहानियाँ कह दी हो तुमने एक लम्हें [...]

By | October 31st, 2018|Love|1 Comment

प्रेम बस पाना ही तो नहीं! कविता

  अब कौन कहाँ है? किसे देखूं? प्रश्न किससे करूँ? जख्म हरा है भर जाये शायद, आज कल, महीनों या वर्षों में। पर कौन होगा अब सम्हालने मेरी बिखरती उम्मीदों को? कौन समझेगा मेरे सपनों को? याद है मुझे (तुम्हें भी तो याद होगा ही) कैसे अश्रुधार में, डबडबाती आँखों से देखा था हमने एक-दूसरे को जब हाथ छुड़ाए हमने परिस्थितियों से हारके। सहज सरल सरस बस समझ गए हम [...]

By | September 16th, 2018|Love|3 Comments

when we lost – a poem

That helpless memory of helpless me and you too, helpless and just nothing could we do about it when we had to exit our dreamy world and embrace the rotten garden; yes, once again!   for us both, forever

By | September 14th, 2018|Love|0 Comments

Familiar Stranger – Love & Mystery – Poem

Why should I stop this ever-unsung tune of warmth of this strange coldness that brings our love closer when I hold you just beneath my breath and your lips give salvation to mine and properly, carefully enshrine the bodies which pleasantly cage our happy souls and after all this, I think never to pull the curtain because we need to be free and to be free we need this mystery [...]

By | August 2nd, 2018|Love|0 Comments

कविता तुम हो – Hindi Poem

  कवि हूँ या नहीं मैं दुनिया बाद में निर्णय कर ले पर मेरी कविताओं की तो आत्मा तुम हो शब्द मेरे भले ही उभरते कागजों पे हों एक-एक शब्द की वासना तुम हो तुम हो तो मैं हूँ और है मेरी कविता इस प्रेम के सूरदास की उपासना तुम हो!   by Alok Mishra  dedicated to M

By | June 23rd, 2018|Love|3 Comments

देखा तुम्हें मैंने, फिरसे… Hindi Poem

देखा तुम्हें मैंने, फिरसे... फिरसे देखा तुम्हें आज मैंने जब आके तुम सुबह-सुबह मेरे पास बैठी और भींगे बालों से टपकती वो दो-चार बूंदें छू गयी फिरसे शरीर के अंदर छुपी मेरी आत्मा को।  .. देखा मैंने फिर आँखों में तुम्हारी और कोशिश की फिरसे लगातार असफलताओं के सिलसिले को तोड़ देने की - गहराईयों में तुम्हारे चक्षुओं की फिरसे डूब गया मैं पर जान न सका सीमाओं को; क्या [...]

By | April 23rd, 2018|Love|0 Comments