हे गंगा माँ, विराग दो! – Ganga Stuti Hindi
गंगा, निर्मल, अविरल, निश्छल, शीतल, उज्जवल स्वर्ग-जलधि, पाप-संहारिणी, करूँ मैं यदि सर्वस्व-समर्पण करेगी तू मेरा पालन-पोषण? हे माँ, विराग दो! अब बंधनो से निकल जाने दे। कितने ही हस्तिनापुर बन गए हैं मन की दुर्गम खोहों में, स्वार्थ और…










