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हे गंगा माँ, विराग दो! - Ganga Stuti poem in Hindi
हे गंगा माँ, विराग दो! – Ganga Stuti Hindi
5th April 2019

हे गंगा माँ, विराग दो! – Ganga Stuti Hindi

  गंगा, निर्मल, अविरल, निश्छल, शीतल, उज्जवल स्वर्ग-जलधि, पाप-संहारिणी, करूँ मैं यदि सर्वस्व-समर्पण करेगी तू मेरा पालन-पोषण? हे माँ, विराग दो! अब बंधनो से निकल जाने दे। कितने ही हस्तिनापुर बन गए हैं मन की दुर्गम खोहों में, स्वार्थ और…

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Tumhen jab chalna ho poem Hindi Motivational Alok Mishra
पथ पर जो चलो तुम पथिक – Motivational Poem
27th March 2019

पथ पर जो चलो तुम पथिक – Motivational Poem

  पथ पर जो चलो तुम पथिक, एक-एक पग में अडिग विश्वास रखो। चलो, तो स्वयं चलो और भाग्य से पृथक, अपने कर्मों को सजग करो। प्रवाह में विचलित वो टूटी टहनी न बनो जो वहीँ तक जाएगी जहाँ नदी…

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Love Poems in Hindi Alok Mishra Poet
बंदिशों को टूट जाने दो… love poem in Hindi
22nd March 2019

बंदिशों को टूट जाने दो… love poem in Hindi

  पंख तो दे दिये अरमानों को तुमने अब बंदिशों को भी टूट जाने दो अनंत तक देख लेने दो तुम्हें समीप से अब दायरों को पीछे छूट जाने दो प्रेम में कोई बंधन तो नहीं होता? बताओ अगर मुहब्बत…

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Nirvana - Hindi Poem
निर्वाण – Hindi Poem
17th January 2019

निर्वाण – Hindi Poem

जैसे निर्वाण मिला हो मेरी मोक्ष की महत्वाकांक्षा को बस एक बार जो छू लेते हैं लब तेरे मेरे प्रफुल्लित अधरों को जो बस अंकुरित से हुए हैं प्रेम की बारिश में! मेरी इच्छाओं की धुंध पे पड़ती हैं जब…

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one year of love poem
एक बरस निकल गया – Hindi poem on love’s journey
31st October 2018

एक बरस निकल गया – Hindi poem on love’s journey

  कुछ तो था कहीं न कहीं अधूरा मुझमें, और शायद तुम में भी। वर्षों की तन्हाई, एक लम्बी जुदाई, अलग-अलग राहों पे अपने-अपने सफर, अनजान, खोये अपने जीवन में हम-तुम कुछ तो हुआ तुम्हें और फिर मुझे भी की…

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