A Poem A Day

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पथ पर जो चलो तुम पथिक – Motivational Poem

  पथ पर जो चलो तुम पथिक, एक-एक पग में अडिग विश्वास रखो। चलो, तो स्वयं चलो और भाग्य से पृथक, अपने कर्मों को सजग करो। प्रवाह में विचलित वो टूटी टहनी न बनो जो वहीँ तक जाएगी जहाँ नदी ले जाये! अपने अस्तित्व का बोध करो, स्वयं अपना भाग्य रचो। पथ पर जो चलो तुम पथिक, एक-एक पग में अडिग विश्वास रखो। भूभाग के अंत में क्या है? जलाशयों [...]

By | March 27th, 2019|A Poem A Day|3 Comments

बंदिशों को टूट जाने दो… love poem in Hindi

  पंख तो दे दिये अरमानों को तुमने अब बंदिशों को भी टूट जाने दो अनंत तक देख लेने दो तुम्हें समीप से अब दायरों को पीछे छूट जाने दो प्रेम में कोई बंधन तो नहीं होता? बताओ अगर मुहब्बत में फासले होते हों तो। शब्द तो हार गए कबके इसे परिभाषित करने के प्रयत्न में अगर कोई अल्फ़ाज़-बयां चाहत का हो तो बता दो। जताओ न चाहतें अब दूर [...]

By | March 22nd, 2019|Love|0 Comments

Love is too bright to be dark… a poem by Alok Mishra

A heart too big? A mind too narrow? A life seemingly unending? A world too daunting to live? Where is the truth I was looking for? Does love end? Does love fail? Seldom often rarely never always Yes, a hiatus a look away a pause in the incessant stroll and it will roll once again towards the destination, a destination that's destiny too, perpetually there, always true. Only lovers know. [...]

By | March 8th, 2019|Love|1 Comment

निर्वाण – Hindi Poem

जैसे निर्वाण मिला हो मेरी मोक्ष की महत्वाकांक्षा को बस एक बार जो छू लेते हैं लब तेरे मेरे प्रफुल्लित अधरों को जो बस अंकुरित से हुए हैं प्रेम की बारिश में! मेरी इच्छाओं की धुंध पे पड़ती हैं जब धुप तुम्हारी मुहब्बत की सिहर उठता है मेरा मन, एक आवेश में और छूट जाता है तन पीछे, कोसों दूर कहीं प्रकाश, तेज, नूर… कहीं ये मिलन तो नहीं व्याकुल [...]

By | January 17th, 2019|Love|0 Comments

Pattern of Life… a poem

It strikes; you wish or not. It does strike - the vehement anguish of knowing everything that was, is and will be ahead. I saw your rise. I see my fall. Surmise. I knew always. My truth is beyond your lies. You still rise. I still fall. I have never been. I have seen it all already.  

By | November 18th, 2018|A Poem A Day|0 Comments

एक बरस निकल गया – Hindi poem on love’s journey

  कुछ तो था कहीं न कहीं अधूरा मुझमें, और शायद तुम में भी। वर्षों की तन्हाई, एक लम्बी जुदाई, अलग-अलग राहों पे अपने-अपने सफर, अनजान, खोये अपने जीवन में हम-तुम कुछ तो हुआ तुम्हें और फिर मुझे भी की रुकी तुम फिर से उसी मोड़ पे और पुकारा मुझे फिर से गहराई थी, एक ठहराव सा तुम्हारी आवाज में, मानो वर्षों की कहानियाँ कह दी हो तुमने एक लम्हें [...]

By | October 31st, 2018|Love|1 Comment

Nothing will be the same again – poem

  The street lamp emits white and cold light tonight, as usual. It's 2 AM. Dogs bark and tear the breast of silent street, like every other night. I explore the corridor occasionally. Either happiness or sadness embraces my heart when I look down from the second floor. Tonight, the white light is dark to me. Noises are silent and the wind is still. No moon shines. No stars glitter. [...]

By | September 18th, 2018|A Poem A Day|1 Comment

प्रेम बस पाना ही तो नहीं! कविता

  अब कौन कहाँ है? किसे देखूं? प्रश्न किससे करूँ? जख्म हरा है भर जाये शायद, आज कल, महीनों या वर्षों में। पर कौन होगा अब सम्हालने मेरी बिखरती उम्मीदों को? कौन समझेगा मेरे सपनों को? याद है मुझे (तुम्हें भी तो याद होगा ही) कैसे अश्रुधार में, डबडबाती आँखों से देखा था हमने एक-दूसरे को जब हाथ छुड़ाए हमने परिस्थितियों से हारके। सहज सरल सरस बस समझ गए हम [...]

By | September 16th, 2018|Love|3 Comments

when we lost – a poem

That helpless memory of helpless me and you too, helpless and just nothing could we do about it when we had to exit our dreamy world and embrace the rotten garden; yes, once again!   for us both, forever

By | September 14th, 2018|Love|0 Comments

And they won! A Poem

His or her? He or she? Wounds, broken bones, fired skulls, pieces of belly, legs and chopped hands; ah! a superpower won the war. a poem by Alok Mishra

By | August 4th, 2018|Caprice|2 Comments