skip to Main Content
Fir Chala Hun Heartbroken Poem
फिर चला हूँ अपने पथ पर… Hindi Poem
8th April 2019

फिर चला हूँ अपने पथ पर… Hindi Poem

  मैं चला था अपने पथ पर, गंतव्य की खोज में निकला था। मुड़ा फिर, अचानक, हँसा, रोया। फिर मुड़ा हूँ अभी, पड़ाव का अंत! फिर चला हूँ अपने पथ पर और बिना मुड़े अब पहुँचना है, भाग्य-निहित गंतव्य तलाशना…

Read More
हे गंगा माँ, विराग दो! - Ganga Stuti Poem In Hindi
हे गंगा माँ, विराग दो! – Ganga Stuti Hindi
5th April 2019

हे गंगा माँ, विराग दो! – Ganga Stuti Hindi

  गंगा, निर्मल, अविरल, निश्छल, शीतल, उज्जवल स्वर्ग-जलधि, पाप-संहारिणी, करूँ मैं यदि सर्वस्व-समर्पण करेगी तू मेरा पालन-पोषण? हे माँ, विराग दो! अब बंधनो से निकल जाने दे। कितने ही हस्तिनापुर बन गए हैं मन की दुर्गम खोहों में, स्वार्थ और…

Read More
Tumhen Jab Chalna Ho Poem Hindi Motivational Alok Mishra
पथ पर जो चलो तुम पथिक – Motivational Poem
27th March 2019

पथ पर जो चलो तुम पथिक – Motivational Poem

  पथ पर जो चलो तुम पथिक, एक-एक पग में अडिग विश्वास रखो। चलो, तो स्वयं चलो और भाग्य से पृथक, अपने कर्मों को सजग करो। प्रवाह में विचलित वो टूटी टहनी न बनो जो वहीँ तक जाएगी जहाँ नदी…

Read More
Love Poems In Hindi Alok Mishra Poet
बंदिशों को टूट जाने दो… love poem in Hindi
22nd March 2019

बंदिशों को टूट जाने दो… love poem in Hindi

  पंख तो दे दिये अरमानों को तुमने अब बंदिशों को भी टूट जाने दो अनंत तक देख लेने दो तुम्हें समीप से अब दायरों को पीछे छूट जाने दो प्रेम में कोई बंधन तो नहीं होता? बताओ अगर मुहब्बत…

Read More
Firse Mahabharata Poem Sainik India Alok
फिरसे एक महाभारत अब ठन जाने दो! (a poem in the memory of Pulwama martyrs)
16th February 2019

फिरसे एक महाभारत अब ठन जाने दो! (a poem in the memory of Pulwama martyrs)

The Episode of Pulwama Terror Attack फिर से निकलीं कुछ अर्थियां हैं उसी रास्ते, जिस रास्ते कुछ गये थे शायद पिछले माह ही और फिर जायेंगे कुछ किसी दिन और सही। उदित नहीं हुए होंगे कुछ सूर्य फिर कभी और…

Read More
My Poetic Angst Alok Mishra Poem
प्रेम, तुम, मैं और हम…
22nd December 2018

प्रेम, तुम, मैं और हम…

मेरे स्वप्नों को वसंत-स्वप्न के बाहर प्रेम-सत्य की धरा पर, कुछ ऐसे तुमने उतारा है, प्रिये, मानो जीवंत हो गए हों पुनः वो सारे पुष्प जो मुरझाये से थे रेतीले सागर के गहराई में, पीड़ित,वंचित और उपेक्षित से। छूकर प्यार…

Read More
Back To Top
×Close search
Search