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fir chala hun heartbroken poem
फिर चला हूँ अपने पथ पर… Hindi Poem
8th April 2019

फिर चला हूँ अपने पथ पर… Hindi Poem

  मैं चला था अपने पथ पर, गंतव्य की खोज में निकला था। मुड़ा फिर, अचानक, हँसा, रोया। फिर मुड़ा हूँ अभी, पड़ाव का अंत! फिर चला हूँ अपने पथ पर और बिना मुड़े अब पहुँचना है, भाग्य-निहित गंतव्य तलाशना…

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हे गंगा माँ, विराग दो! - Ganga Stuti poem in Hindi
हे गंगा माँ, विराग दो! – Ganga Stuti Hindi
5th April 2019

हे गंगा माँ, विराग दो! – Ganga Stuti Hindi

  गंगा, निर्मल, अविरल, निश्छल, शीतल, उज्जवल स्वर्ग-जलधि, पाप-संहारिणी, करूँ मैं यदि सर्वस्व-समर्पण करेगी तू मेरा पालन-पोषण? हे माँ, विराग दो! अब बंधनो से निकल जाने दे। कितने ही हस्तिनापुर बन गए हैं मन की दुर्गम खोहों में, स्वार्थ और…

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