skip to Main Content
main-hindi-poem-by-alok-mishrajpg
Main – A Hindi Poem
5th November 2016

Main – A Hindi Poem

बस अब डूबता ही समझ लो मुझे भी की लहरों से टकराने का अब बस मन नहीं। बहुत खुशनसीब था मैं की ज़िन्दगी मिली की अब मर जाने का भी खास गम नहीं।। हँस लिये, रो लिये दो-चार पुष्प हिस्से के…

Read More
alok-mishra-poems-hindi-shayari
समंदर और साहिल Samandar aur Sahil | Poem | Hindi
21st October 2016

समंदर और साहिल Samandar aur Sahil | Poem | Hindi

काश की हमने समंदर से यूँ किनारा न किया होता, और बढ़ाई न होती साहिलों से दोस्ती अपनी, फिर आज हममें भी लहरों की रवानी होती। पर करते भी क्या जब मौजों को ये मुनासिब न था? सितम करते हैं…

Read More
Hindi Shayaris Alok Mishra
Shayaris in Hindi | Some Two-liners by Alok Mishra
19th October 2016

Shayaris in Hindi | Some Two-liners by Alok Mishra

चलो हमने कुछ दिया या नहीं मुहब्बत में पर तुमने तो, हाँ, बेवफाई ही दी हमें! Chalo hamne kuchh diya ya nahi muhabbat me par tumne to, han, bewafai hi di hame! वो चाँद भी कोसता होगा चाँदनी को अपनी…

Read More
hindi-poem-by-alok-mishra
मैं वहाँ भी था। Main Wahan Bhi Tha | Hindi Poem |
17th October 2016

मैं वहाँ भी था। Main Wahan Bhi Tha | Hindi Poem |

बिखरे पते, सूखे वन-उपवन, प्यासे जलाशय, व्याकुल मानव मन... मैं वहाँ भी था! जाने कितने दुःशासन, कितने महाभारत समर और कितनी द्रौपदियों के चीर हरण, हाँ, मैं वहाँ भी था! खिले वसंत की अरुणाई, मानो संसार के मुख मंडल पे…

Read More
rajsthan-women-water-sands
Poem Dedicated to Women of Rajsthan Who Walk Endlessly for Water
2nd October 2016

Poem Dedicated to Women of Rajsthan Who Walk Endlessly for Water

जल   श्वानों के शौक हैं तैराकी मस्ती जल के सैलाबों में, यहाँ थकती है माँ कि छाती, बढती है वो निरंतर बिना बैठे और सुस्ताती | लिये गगरी वो निकल पड़ी खाली पैर बालू के चादर पे, हे नभ…

Read More
Back To Top
Search