मेरे शब्द | My Words | Web Poetry Series – Poem One
जाने क्यूँ ये शब्द मेरे व्याकुल हैं तुम्हारे सान्निध्य को, एक बार फिर से? तुमने ही तो ठुकराया था इन्हें, अपनी ख़ामोशी से जब मैंने पूछे थे कुछ सवाल। मैं तो शायद समझ भी लूँ अपनी विवशता और मौन…
जाने क्यूँ ये शब्द मेरे व्याकुल हैं तुम्हारे सान्निध्य को, एक बार फिर से? तुमने ही तो ठुकराया था इन्हें, अपनी ख़ामोशी से जब मैंने पूछे थे कुछ सवाल। मैं तो शायद समझ भी लूँ अपनी विवशता और मौन…