Poems

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The Hawk’s Melancholy

The Hawk's Melancholy a poem by Alok Mishra A dried reservoir a lacking effort a failed creation a dead day dream an incomplete journey an empty completeness still the day rises, day after day; still the night falls, night after night.

By | March 15th, 2017|Poems|0 Comments

Bharat ke Tukde: Poem on Patriotism vs Anti-nationalism

राष्ट्र विरोधी ताकतों के नाम एक सन्देश कविता के माध्यम से    कर ही दो अब भारत के टुकड़े और ले लो कोई कोना तुम लोग, वहीं ख़ुशी से नाचो गाओ विरोध स्वर में नारे लगाओ अपने टुकड़े को भी और तोड़ते जाओ। पर जाओ, मेरी बलिदान की धरती से दूर जाओ और ले जाओ अपने साथ 'दूषित' अभिव्यक्ति की आजादी को भी की आजीज हो उठा है अब हृदय [...]

By | February 28th, 2017|Hindi Poems|2 Comments

Saraswati Vandana Poem in Hindi

वीणावादिनी, स्वरा, विद्यादायिनी देवी ज्ञान की विवेक की जननी शत शत नमन तेरे चरण माँ सरस्वती। मृदु स्वर कंठ को विवेक मन को सुविचार जन जन को पुन्ज ज्ञानप्रकाश की क्लेषित जीवन को सदा तू देती। शत शत नमन तेरे चरण माँ सरस्वती। कुंठित मानव, रुदन क्रदन कुंठित हुए हैं जन भाव अज्ञानता के वन में विचरण कर रहे कृतियाँ और काव्य! तेरे द्वार खड़े हैं हम लेकर अपनी व्यथा [...]

By | February 1st, 2017|Hindi Poems|0 Comments

Jai Jawan | Hindi Poem on Brave Indian Army

ये वामपंथ क्या है? कोई मुझे समझाएगा? देशभक्ति का जूनून और उसमें घुलता लहू, मेघ सी हुंकार और सिंह सी गर्जना, ये तो कर्मवीर हैं जानते हैं बस सर्वस्व समर्पण करना। अब वामपंथी हमारे, बड़े विचारों वाले सिखाएंगे तोप चलाने वालों को संयम से संवाद करना? अपनी ही माता के मष्तक की संधि करना? विचारकों, खिंच लो कदम पीछे छुप जाओ किसी कोने में ये वही वीर हैं भारत के [...]

By | November 23rd, 2016|Hindi Poems|2 Comments

Main – A Hindi Poem

बस अब डूबता ही समझ लो मुझे भी की लहरों से टकराने का अब बस मन नहीं। बहुत खुशनसीब था मैं की ज़िन्दगी मिली की अब मर जाने का भी खास गम नहीं।। हँस लिये, रो लिये दो-चार पुष्प हिस्से के पलों में पिरो लिये, बस हो तो गयी ज़िन्दगी, और खुद से मिलने अब चल दिए। जो टालते आया वर्षों से मैं हाँ वही तो सच्चाई है, ये पल दो [...]

By | November 5th, 2016|Hindi Poems|0 Comments

Budha? The Escapist? Poem

Buddha – the escapist? The old man selling tea, Young men with office-burden Decorated on their back Walk on the road And I walk the same Thinking of world, wisdom and woe. Heavy steps I raise Nearing the door of my workplace Thinking of fribble, friend and foe. Did Buddha think of his family? Now on the office chair I justify my oblivious attitude. Yes, he moved into some anomaly! [...]

By | October 22nd, 2016|Poems|0 Comments

समंदर और साहिल Samandar aur Sahil | Poem | Hindi

काश की हमने समंदर से यूँ किनारा न किया होता, और बढ़ाई न होती साहिलों से दोस्ती अपनी, फिर आज हममें भी लहरों की रवानी होती। पर करते भी क्या जब मौजों को ये मुनासिब न था? सितम करते हैं वो कभी बिना सितम किये भी... और फिर मेरी कश्ती पे भी लहरों का भरोसा कभी था नहीं! गर्म रेत पे खड़े होके समंदर के किनारे देखता हूँ मैं अब [...]

By | October 21st, 2016|Hindi Poems|0 Comments

मैं वहाँ भी था। Main Wahan Bhi Tha | Hindi Poem |

बिखरे पते, सूखे वन-उपवन, प्यासे जलाशय, व्याकुल मानव मन... मैं वहाँ भी था! जाने कितने दुःशासन, कितने महाभारत समर और कितनी द्रौपदियों के चीर हरण, हाँ, मैं वहाँ भी था! खिले वसंत की अरुणाई, मानो संसार के मुख मंडल पे आभा हो नयी कोई खिल आयी, मैं वहाँ भी था! कर्मठ शरीर के कर्मकांड, मानवी के वो क्षमा-त्याग और वक्त-पथ पे बढ़ता जीवन, हाँ, मैं वहां भी था... हूँ सदा, [...]

By | October 17th, 2016|Hindi Poems|0 Comments

Poem Dedicated to Women of Rajsthan Who Walk Endlessly for Water

जल   श्वानों के शौक हैं तैराकी मस्ती जल के सैलाबों में, यहाँ थकती है माँ कि छाती, बढती है वो निरंतर बिना बैठे और सुस्ताती | लिये गगरी वो निकल पड़ी खाली पैर बालू के चादर पे, हे नभ इन्हें क्षमा कर दे माँ कि ममता को तो आदर दे ! बातें होतीं बड़ी बड़ी यहाँ बूंदों को लोग तरसते हैं, यहाँ अश्रु पड़ते हैं पिने, वहाँ फुहारों में [...]

By | October 2nd, 2016|Hindi Poems|0 Comments

Sudden Thoughts | Poem

Sudden Thoughts All those, in fact, tantamount, and I count, construe and discern the hours, minutes, seconds and days, plenty or one? Bright light or pleasant horizon? Well, now I know... At times, we are compelled to reciprocate to our heart's feelings... in words... in actions or any other way. Can you resist? I could not and this poem is the result!  

By | October 1st, 2016|Poems|0 Comments